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कक्षा 10विषय कोड: 085वर्ष: 202518 प्रश्न उपलब्ध

CBSE कक्षा 10वीं Hindi Course B (2025) — संपूर्ण प्रश्नोत्तर व समाधान

CBSE कक्षा 10वीं Hindi Course B बोर्ड परीक्षा (2025) के लिए क्विज़क्लस्टर द्वारा तैयार प्रामाणिक एवं विस्तृत हल। सभी प्रश्नों के उत्तर शुद्ध हिंदी भाषा में उपलब्ध हैं।

Official Source & AttributionSource of question paper: Central Board of Secondary Education (CBSE)

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प्रश्न सूची

प्रश्न 1 / 18
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Q1

अपठित गद्यांश : भारतीय संस्कृति एवं प्रकृति-प्रेम

Section A7 अंकअध्याय: अपठित गद्यांश (पठन कौशल)
मध्यम
प्रश्न 1 — मूल प्रश्न विवरण (Question Synopsis)
मूल प्रश्न पत्र में देखें
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: 'भारतीय संस्कृति में प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु न मानकर पूजनीय और मातृवत माना गया है। प्राचीन काल से ही हमारे ऋषियों ने नदियों को माँ, वृक्षों को देवता और पर्वतों को तपस्या का केंद्र माना है। आज के उपभोक्तावादी युग में मानव ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करके स्वयं अपने अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। प्रदूषण, अनियंत्रित ऋतु-चक्र और भूमंडलीय तापवृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) इसी असंतुलन के परिणाम हैं।' (i) भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति कैसा दृष्टिकोण रहा है? (ii) आधुनिक उपभोक्तावादी संस्कृति का पर्यावरण पर क्या दुष्प्रभाव पड़ा है? (iii) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
CBSE कक्षा 10वीं Hindi Course B आधिकारिक प्रश्न पत्र (2025) — प्रश्न संख्या 1 देखें
क्विज़क्लस्टर प्रामाणिक चरणबद्ध समाधान व उत्तर

भाग (i) का उत्तर : भारतीय संस्कृति में प्रकृति का दृष्टिकोण

भारतीय संस्कृति में प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि मातृवत और पूजनीय माना गया है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने नदियों को 'जीवनदायिनी माँ', वृक्षों को 'देवता' और पर्वतों को 'साधना एवं तपस्या का केंद्र' मानकर प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संतुलन का संदेश दिया है।

भाग (ii) का उत्तर : उपभोक्तावादी संस्कृति के दुष्प्रभाव

आधुनिक उपभोक्तावादी युग में मानव द्वारा किए गए अंधाधुंध प्राकृतिक दोहन से गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हुआ है। इसके प्रमुख दुष्प्रभाव हैं — 1. वायु, जल और मृदा प्रदूषण में भारी वृद्धि। 2. ऋतु-चक्र में अनपेक्षित परिवर्तन एवं अनियमित वर्षा। 3. भूमंडलीय तापवृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) और ग्लेशियरों का पिघलना, जिससे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व संकटग्रस्त हो गया है।

भाग (iii) का उत्तर : उपयुक्त शीर्षक

उपयुक्त शीर्षक : 'भारतीय संस्कृति और प्रकृति-संरक्षण' अथवा 'प्रकृति और आधुनिक मानव' अथवा 'पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता'।

अंतिम निष्कर्ष / उत्तर
(i) प्रकृति को मातृवत व पूजनीय मानना | (ii) प्रदूषण, अनियंत्रित ऋतु-चक्र व ग्लोबल वॉर्मिंग | (iii) शीर्षक : भारतीय संस्कृति और प्रकृति-संरक्षण
प्रमुख व्याकरण नियम / सिद्धांत / सूत्र
  • अपठित गद्यांश हल करने के नियम : मूल भाव समझना, सरल व सटीक भाषा में उत्तर, यथासंभव अपने शब्दों का प्रयोग।
महत्वपूर्ण मुख्य संकल्पना

अपठित गद्यांश के प्रश्नों का उत्तर गद्यांश के मूल कथ्य और केंद्रीय भाव पर आधारित होना चाहिए।

सामान्य त्रुटियाँ व सावधानियाँ

गद्यांश की पंक्तियों को ज्यों का त्यों उतारना अथवा अपनी ओर से अप्रासंगिक जानकारी जोड़ना।

अपठित गद्यांश (पठन कौशल) में निपुणता हासिल करें
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अपठित गद्यांश (पठन कौशल) अभ्यास क्विज़
प्रश्न 1 / 18

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